देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भरता के विजन को सहसपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने हुनर से आगे बढ़ा रही हैं। शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में ग्रामीण महिलाएं सूती कपड़े से हाथ से तिरंगे तैयार कर रही हैं। इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लिए यहां तैयार किए गए 5 हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज लोगों तक पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना (रीप) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से संचालित इस पहल ने महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोले हैं। आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार करती हैं। स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं, सरकारी विभागों, राजनीतिक दलों और स्थानीय बाजार से भी इन तिरंगों की मांग रहती है।
स्वरोजगार का बना मजबूत जरिया
शंकरपुर सिलाई यूनिट का संचालन कर रहीं जयमाला ने बताया कि यूनिट के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार का अवसर मिला है। विभिन्न विभागों से राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के ऑर्डर मिलने से महिलाओं को अपनी मेहनत और हुनर को बाजार तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी चांदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के आसपास तिरंगों की मांग काफी बढ़ जाती है। सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कॉलेजों, राजनीतिक संगठनों और स्थानीय बाजार से मिलने वाले ऑर्डर महिलाओं की आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया बन रहे हैं।
प्रशासन भी खरीद रहा तिरंगे
रीप की जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि सहसपुर ब्लॉक में रीप के तहत स्थापित सिलाई यूनिट में महिलाएं बड़े स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए उत्पादन बढ़ाया गया है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रीप और एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनकी रुचि के क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 15 अगस्त को देखते हुए महिलाएं अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन भी इनसे राष्ट्रीय ध्वज खरीद रहा है, जबकि स्थानीय बाजार में भी इनके बनाए तिरंगों की अच्छी मांग है।