गुवाहाटी। असम में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य के 12 जिलों में अब भी 1.47 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। शनिवार को गोलाघाट जिले में एक और शव मिलने के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। कई इलाकों में जनजीवन अभी भी सामान्य नहीं हो पाया है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 8 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, धनसिरि नदी नुमलीगढ़ और गोलाघाट क्षेत्र में तथा कुसियारा नदी श्रीभूमि इलाके में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में देखने को मिल रहा है।
राज्य के शोणितपुर, नगांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजाई, दरंग, जोरहाट, धेमाजी, चराईदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और बिश्वनाथ जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों के 30 राजस्व मंडलों के 460 गांव प्रभावित हुए हैं। करीब 1,47,376 लोग बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे हैं, जबकि 10,599.89 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, डीडीआरएफ, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के साथ स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत कार्यों में जुटे हैं। शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में 55 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया। राहत कार्य में 10 नावें भी लगाई गईं। इनके जरिए 135 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि पांच मवेशियों को भी सुरक्षित निकाला गया।
इस बीच बाढ़ ने सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। राज्य सरकार क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए लगातार समीक्षा कर रही है।
सरकार 10 अगस्त से स्कूल खोलने की तैयारी में है, लेकिन कई विद्यालयों में अब भी कीचड़ जमा है और कुछ ऊंचाई वाले स्कूलों में बाढ़ प्रभावित लोग शरण लिए हुए हैं। ऐसे में तय तारीख से शिक्षण कार्य शुरू हो पाएगा या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और राज्य सरकार के मंत्री अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।