कनाडा में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच एक नई रिपोर्ट ने इमिग्रेशन व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ संगठित आपराधिक नेटवर्क कथित तौर पर स्टडी और वर्क परमिट के जरिए लोगों को कनाडा पहुंचाकर उन्हें अपनी आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इसका संबंध भारतीय छात्रों के बड़े समुदाय से नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा मामलों से है।
रिपोर्ट में कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि कुछ भारतीय नागरिक, जो पढ़ाई या रोजगार के उद्देश्य से कनाडा पहुंचे थे, बाद में कथित तौर पर जबरन वसूली, हिंसा और अन्य आपराधिक मामलों में शामिल पाए गए।
इस पूरे मामले में गोल्डी बराड़ का नाम प्रमुखता से सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, वह वर्ष 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचा था और ब्रिटिश कोलंबिया की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। बाद में उस पर कनाडा में बिश्नोई नेटवर्क को मजबूत करने के आरोप लगे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ युवाओं को पहले वैध इमिग्रेशन प्रक्रिया के तहत कनाडा भेजा गया और बाद में कथित तौर पर अपराधी गिरोहों से जोड़ा गया। रिपोर्ट में 2016 से 2024 के बीच भारतीय स्टडी परमिट धारकों से जुड़े आपराधिक मामलों में बढ़ोतरी का दावा किया गया है। हालांकि इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक मानी जा रही है।
कनाडाई एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि संदिग्ध लोगों को प्रवेश दिलाने में किस तरह की सहायता मिली, दस्तावेजों की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और वहां पहुंचने के बाद वे किन नेटवर्क के संपर्क में आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टडी और वर्क परमिट जैसी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग रोकना कनाडा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी वजह से सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए हैं। भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा तथा संगठित अपराध पहले से ही संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। ऐसे में इस जांच के नतीजे दोनों देशों के बीच भविष्य की बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि लाखों भारतीय छात्रों को कुछ मामलों के आधार पर संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं होगा। वास्तविक चुनौती उन संगठित गिरोहों पर कार्रवाई करना है, जो इमिग्रेशन व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।