रिलायंस कैपिटल पर CBI का शिकंजा, EPFO को 1,816 करोड़ के नुकसान का आरोप

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और कंपनी के पूर्व अध्यक्ष अनिल डी. अंबानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के फंड से रिलायंस कैपिटल के सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों में किए गए निवेश से जुड़ा है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की शिकायत के अनुसार, इस निवेश से EPFO को करीब 1,816.22 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है।

मामले में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 21 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और EPFO को कथित तौर पर गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अनिल अंबानी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

शिकायत के मुताबिक रिलायंस कैपिटल ने वर्ष 2013 और 2014 में सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी किए थे। इसके बाद पोर्टफोलियो मैनेजरों ने EPFO के फंड से इन डिबेंचरों में करीब 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया। इन निवेशों की परिपक्वता अवधि 2023 और 2024 में पूरी होनी थी। मंत्रालय का आरोप है कि इन निवेशों के चलते EPFO को 1,816.22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

श्रम मंत्रालय ने यह शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी और जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, BDO India LLP द्वारा किए गए लेनदेन और दस्तावेजों की जांच में दिसंबर 2019 से दिसंबर 2021 के बीच रिलायंस कैपिटल और उसके प्रबंधन से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले।

शिकायत में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग, अनियमित तरीके से ऋण देने, सुरक्षा में कमी और अन्य वित्तीय लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। इन मामलों की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है।

एफआईआर पर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि मामला रिलायंस कैपिटल से संबंधित है। उन्होंने बताया कि अनिल अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक और बोर्ड के अध्यक्ष रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी के बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त किया था। प्रवक्ता के मुताबिक अनिल अंबानी ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कानून के तहत उपलब्ध अपने अधिकार सुरक्षित रखे हैं।

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