युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (एनसीओआरडी) की बैठक में स्पष्ट कहा कि ड्रग्स के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर युवा का सुरक्षित भविष्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए नशे की पूरी सप्लाई चेन को तोड़ना जरूरी है।
बैठक में जिलाधिकारी ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि पुराने अपराधों के आंकड़ों का जीआईएस विश्लेषण कर जनपद के ड्रग्स हॉटस्पॉट और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए। उन्होंने चाय-तंबाकू की दुकानों, मेडिकल स्टोरों और स्लम बस्तियों में विशेष निगरानी रखने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डॉ. आशीष चौहान ने सभी उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) को जनपद में संचालित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और उनके संचालन को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में बताया गया कि जिले में 84 पंजीकृत और दो अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्रों का सत्यापन किया गया, जिनमें 23 केंद्र बंद मिले। वहीं 15 केंद्रों में अनियमितताएं पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। 55 केंद्रों की रिपोर्ट राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है।
पुलिस विभाग ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में अब तक मादक पदार्थों से जुड़े 151 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 170 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उच्च शिक्षण संस्थानों में चलाए गए ड्रग्स टेस्टिंग अभियान के तहत 711 छात्रों के नमूने लिए गए, जिनकी सभी रिपोर्ट नकारात्मक आई हैं। वहीं ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बताया कि सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य कर दिए गए हैं तथा फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
बैठक में रायवाला स्थित राजकीय नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की क्षमता 15 से बढ़ाकर 30 बेड करने की जानकारी भी दी गई। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ नशा मुक्त समाज बनाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।