नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर दिखने वाली लग्जरी लाइफस्टाइल का असर अब युवाओं की आर्थिक आदतों पर साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर Gen Z (1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) सोशल मीडिया पर दिखने वाले महंगे ब्रांड, रेस्तरां, विदेशी यात्राओं और प्रीमियम गैजेट्स से तेजी से प्रभावित हो रही है। इसका परिणाम यह है कि कई युवा अपनी आय से अधिक खर्च करने लगे हैं, जिससे भविष्य में आर्थिक अस्थिरता और कर्ज का खतरा बढ़ सकता है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल लोन, ‘बाय नाउ, पे लेटर’ (BNPL) और क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं ने खरीदारी को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। इससे कई युवा बिना पर्याप्त वित्तीय योजना के खर्च कर रहे हैं। आसान भुगतान विकल्पों के कारण खर्च का वास्तविक बोझ बाद में महसूस होता है, जो आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आकर्षक छवि बनाए रखने और रिश्तों में प्रभावित करने की चाहत भी युवाओं के खर्च को बढ़ा रही है। महंगे उपहार, डेटिंग, ब्रांडेड कपड़े और लाइफस्टाइल पर बड़ी रकम खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके चलते नियमित बचत की आदत कमजोर पड़ रही है और कई लोग जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार दूसरों से तुलना करने और बेहतर दिखने की होड़ मानसिक तनाव, चिंता और आर्थिक असुरक्षा को बढ़ा सकती है। हालांकि सोशल मीडिया पर प्रचलित यह दावा कि “85 प्रतिशत ब्रेकअप बढ़ते खर्च और मानसिक दबाव के कारण होते हैं” किसी प्रमाणित या सार्वभौमिक अध्ययन से सिद्ध नहीं है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों की सलाह है कि युवा सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के बजाय अपनी वास्तविक आय और जरूरतों को ध्यान में रखकर खर्च करें। नियमित बचत, सीमित कर्ज और वित्तीय अनुशासन न केवल आर्थिक सुरक्षा देते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन और रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं। उनका मानना है कि भरोसा, संवाद और जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार किसी भी रिश्ते की सबसे मजबूत नींव हैं।