देहरादून। जिले में बढ़ते नशे के प्रचलन और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रशासन ने विभागीय समन्वय के साथ व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति (एनकॉर्ड) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी, उपयोग और अफीम, खस-खस एवं पोस्त की खेती पर रोक लगाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
अपर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहे, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि नशा समाज के लिए गंभीर चुनौती है और इसका सबसे अधिक असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। ऐसे में प्रवर्तनात्मक कार्रवाई के साथ लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है।
बैठक में शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग को मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। स्कूलों और महाविद्यालयों में नियमित कार्यशालाएं, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित करने पर जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थियों को नशे से होने वाले नुकसान और इससे बचाव के उपायों की जानकारी मिल सके।
पुलिस विभाग को जिले के नशा प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों की GIS मैपिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों की नियमित निगरानी करते हुए नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
वहीं, आबकारी विभाग को पोस्त की खेती पर रोक लगाने के लिए संबंधित क्षेत्रों में नियमित छापेमारी करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ ही नशे की गिरफ्त में आए लोगों को चिन्हित कर जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक पुनर्वास उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
अपर जिलाधिकारी ने सभी विभागों से अपने-अपने स्तर पर चल रही कार्रवाई और जागरूकता कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करने तथा ठोस कार्ययोजना के तहत अभियान को निरंतर और परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी अंकित कंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, आबकारी निरीक्षक शिव प्रसाद व्यास समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।