शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे सीजेपी के आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो चर्चा का केंद्र बन गई हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के चलते आंदोलन की जिम्मेदारी अब गीतांजलि ने संभाल ली है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वांगचुक का अनशन जारी है और उन्होंने नमक-पानी के अलावा कुछ भी ग्रहण नहीं किया है।
गीतांजलि ने कहा कि परिवार ने चिकित्सकों से स्पष्ट अनुरोध किया है कि उनकी या इलाज कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना वांगचुक को मुंह अथवा नसों के माध्यम से कोई पोषण न दिया जाए। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन अपनी मांगों को लेकर पहले की तरह जारी रहेगा और पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।
गीतांजलि जे. आंग्मो एक शिक्षाविद, सामाजिक उद्यमी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक हैं। वह वर्तमान में संस्थान की संस्थापक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और डीन के रूप में कार्यरत हैं। यह संस्थान पर्वतीय क्षेत्रों में नवाचार आधारित शिक्षा, सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। संस्थान ने सौर ऊर्जा आधारित भवनों के निर्माण के साथ-साथ वर्ष 2021 में भारतीय सेना के लिए सोलर-हीटेड टेंट भी विकसित किए थे।
ओडिशा के बालासोर में एक पंजाबी परिवार में जन्मीं गीतांजलि ने फकीर मोहन विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक और भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीट्यूट से एमबीए किया। कॉर्पोरेट क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों तक, जिनमें डेनमार्क में लंबा कार्यकाल भी शामिल है, काम करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया।
गीतांजलि चेवनिंग फेलो रह चुकी हैं और उन्हें वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। कराटे में ब्लैक बेल्ट होने के साथ उन्होंने ओडिसी और रूसी बैले नृत्य का प्रशिक्षण भी लिया है। इससे पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग से जुड़े आंदोलन के दौरान भी उन्होंने सोनम वांगचुक के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद वह आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आई हैं।