सादगी और ईमानदारी की मिसाल थे IAS चंद्र सिंह, निधन से शोक की लहर

उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे चंद्र सिंह का निधन प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अपनी ईमानदारी, सादगी और जनसरोकारों के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले चंद्र सिंह ने लंबे प्रशासनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी हमेशा जमीन से जुड़े अधिकारी की छवि बनाए रखी।

15 अगस्त 1942 को जन्मे चंद्र सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे। उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कई जनपदों में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा शासन में अपर सचिव, सचिव और विशेष सचिव जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी संभाले। प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ वे समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए भी निरंतर प्रयासरत रहे।

पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के विचारों से प्रभावित चंद्र सिंह का सामाजिक सरोकारों से गहरा जुड़ाव था। उन्होंने पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्वर्गीय बर्फिया लाल जुवांठा और सर्वोदय नेता स्वर्गीय बिहारी लाल के साथ टिहरी के ठक्कर बापा छात्रावास में शिक्षा प्राप्त की। अपने पैतृक जनपद उत्तरकाशी के विकास को लेकर भी वे हमेशा सक्रिय रहे।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. श्रीगोपाल नारसन ने उनके साथ बिताए कई संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उच्च प्रशासनिक पदों पर रहने के बावजूद चंद्र सिंह बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने बताया कि एक बार सचिवालय में मुलाकात के दौरान चंद्र सिंह ने स्वयं चाय मंगाकर आत्मीयता से बातचीत की। वहीं एक अन्य अवसर पर रोडवेज बस में यात्रा के दौरान उन्होंने बड़े भाई का स्नेह जताते हुए उनका टिकट भी स्वयं खरीदा।

डॉ. नारसन के अनुसार चंद्र सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण था कि बड़ा पद व्यक्ति की सादगी और संवेदनशीलता को कम नहीं करता। उनके निधन से प्रशासनिक सेवा, सामाजिक क्षेत्र और उत्तराखंड ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी ईमानदारी और मानवीय व्यवहार हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

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