राम मंदिर ट्रस्ट के दान पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आखिर क्यों टली तत्काल सुनवाई?

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि निर्देश दिया कि इसे न्यायालय की छुट्टियों के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

याचिका में मांग की गई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान के कथित दुरुपयोग की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये के दान से जुड़े मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

तत्काल सुनवाई की मांग पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिसके चलते मामले की तुरंत सुनवाई की जाए। इसके बाद अदालत ने याचिका को नियमित प्रक्रिया के तहत आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

इस बीच मामले की जांच में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस ने हाल के दिनों में कई स्थानों पर छापेमारी कर नकदी, आभूषण और महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ कर रही हैं और अब तक कई व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान करीब 140 लोगों के बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।

यह मामला राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से मिले दान के उपयोग और उसके वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की नियमित पीठ में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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