वाशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। पहली बार ब्लैक होल के रहस्यमयी इवेंट होराइजन यानी उस सीमा से महत्वपूर्ण संकेत प्राप्त हुए हैं, जिसे वैज्ञानिक ब्लैक होल का “फिंगरप्रिंट” मान रहे हैं। यह वही सीमा है, जहां से प्रकाश तक वापस नहीं लौट सकता। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज न केवल ब्लैक होल की संरचना को समझने में मदद करेगी, बल्कि अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत को भी और अधिक मजबूती प्रदान करती है।
हाल ही में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, यह उपलब्धि गुरुत्वाकर्षण तरंगों (ग्रेविटेशनल वेव्स) के गहन विश्लेषण के माध्यम से हासिल हुई है। ये तरंगें तब उत्पन्न हुई थीं, जब अंतरिक्ष में मौजूद दो विशाल ब्लैक होल आपस में टकराकर एक विशाल ब्लैक होल में विलीन हो गए। इस टक्कर से अंतरिक्ष-समय (स्पेस-टाइम) में पैदा हुई कंपन को अत्याधुनिक वेधशालाओं ने रिकॉर्ड किया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इवेंट होराइजन ब्लैक होल की वह बाहरी सीमा होती है, जिसे “पॉइंट ऑफ नो रिटर्न” भी कहा जाता है। इस सीमा को पार करने के बाद कोई भी वस्तु, यहां तक कि प्रकाश भी वापस नहीं लौट सकता। अब तक इस क्षेत्र का प्रत्यक्ष अध्ययन संभव नहीं था, लेकिन गुरुत्वाकर्षण तरंगों के विश्लेषण ने इस रहस्यमयी क्षेत्र के बारे में नई जानकारी जुटाने का मार्ग खोल दिया है।
शोधकर्ताओं ने टक्कर के अंतिम चरण में उत्पन्न विशेष गुरुत्वाकर्षण संकेतों का अध्ययन किया, जिससे इवेंट होराइजन के बेहद करीब होने वाली प्रक्रियाओं को समझने में सफलता मिली। अध्ययन में यह भी संकेत मिले हैं कि ब्लैक होल अपने आसपास के अंतरिक्ष-समय को घुमा और विकृत कर सकता है। इस प्रक्रिया को “फ्रेम ड्रैगिंग” कहा जाता है, जिसकी भविष्यवाणी आइंस्टीन ने अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत में की थी। प्राप्त आंकड़े इस सिद्धांत के अनुरूप पाए गए हैं।
हालांकि कुछ वैज्ञानिक इस निष्कर्ष की पुष्टि के लिए और अधिक अध्ययन तथा अतिरिक्त प्रमाणों की आवश्यकता बता रहे हैं, लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ इसे ब्लैक होल विज्ञान की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं। उनका मानना है कि भविष्य में और अधिक संवेदनशील उपकरणों की मदद से ऐसे संकेतों का विस्तृत अध्ययन किया गया, तो ब्लैक होल, इवेंट होराइजन और अंतरिक्ष-समय के रहस्यों पर से पर्दा उठ सकता है।