क्या आपका बीपी 140/90 से ऊपर रहता है? जानिए कब बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा

आज की भागदौड़ भरी और बदलती जीवनशैली के कारण हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) तेजी से एक आम स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हल्के में लेना गंभीर परिणाम दे सकता है, क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह हृदय, मस्तिष्क और किडनी से जुड़ी कई जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। यही वजह है कि हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर तब होता है जब हृदय को शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक दबाव लगाना पड़ता है। लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वे कमजोर हो सकती हैं और गंभीर मामलों में फटने का खतरा भी बढ़ जाता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 एमएम एचजी माना जाता है। यदि सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 130 से 139 एमएम एचजी और डायस्टोलिक 80 से 89 एमएम एचजी के बीच रहता है, तो इसे बढ़ा हुआ रक्तचाप माना जाता है। वहीं, यदि ब्लड प्रेशर 140/90 एमएम एचजी या उससे अधिक हो जाए, तो विशेषज्ञ तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि इस स्तर पर हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ लोगों में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों का लाल होना, नाक से खून आना, सीने में दर्द, घबराहट और मतली जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है या जिनके परिवार में इसका इतिहास रहा है, उन्हें नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर जांचते रहना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करके हाई ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक व किडनी रोग जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

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