अलीगढ़। लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अलीगढ़ जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले में बिना पंजीकरण और बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों, लाइब्रेरी, अस्पतालों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के खिलाफ जल्द ही विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सेफ्टी’ चलाया जाएगा।
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले में 50 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में इनमें से केवल 11 कोचिंग सेंटर ही पंजीकृत हैं। वहीं, अग्निशमन विभाग से सिर्फ 15 संस्थानों ने फायर एनओसी प्राप्त की है। इसका मतलब यह है कि अधिकांश कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए हजारों छात्रों की जान जोखिम में डालकर संचालित किए जा रहे हैं।
स्थिति केवल कोचिंग संस्थानों तक सीमित नहीं है। जिले में 10 से अधिक लाइब्रेरी बिना किसी पंजीकरण के संचालित हो रही हैं। इसके अलावा 400 से अधिक नर्सिंग होम, क्लीनिक और अस्पतालों में से केवल 297 संस्थानों के पास ही फायर एनओसी उपलब्ध है। शेष संस्थानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीआईओएस डॉ. पूरन सिंह ने बताया कि अपंजीकृत कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि संबंधित संस्थान निर्धारित नियमों के तहत पंजीकरण नहीं कराते और फायर एनओसी हासिल नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे संस्थानों को बंद भी कराया जा सकता है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि किसी भी कोचिंग सेंटर, अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान का संचालन बिना सुरक्षा मानकों के नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से भी अपील की कि वे फायर एनओसी मिलने के बाद ही संस्थानों का पंजीकरण सुनिश्चित करें।
प्रशासन के इस अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि छात्रों, मरीजों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।