8 लाख किसानों के खातों में पहुंची सम्मान निधि, सीएम धामी ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां

देहरादून। प्रधानमंत्री किसान उत्सव दिवस के अवसर पर शनिवार को हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट, देहरादून में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग करते हुए किसानों को बधाई दी और उन्हें देश की समृद्धि तथा खाद्य सुरक्षा का आधार स्तंभ बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल से देशभर के किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी की गई किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के कार्यक्रम का वर्चुअल माध्यम से प्रसारण भी देखा। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी होने पर प्रदेश के अन्नदाता भाई-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसानों का सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के सम्मान और समृद्धि की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार देश के लगभग 10 करोड़ किसानों को 18,880 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के जरिए हस्तांतरित की गई है। इसमें उत्तराखंड के 8 लाख से अधिक किसानों को 159 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में योजना शुरू होने के समय राज्य में लगभग चार लाख किसान लाभान्वित हो रहे थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर आठ लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने इसे किसानों के डबल इंजन सरकार पर बढ़ते विश्वास और योजनाओं की प्रभावी पहुंच का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे प्रयासों के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है, जिससे किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को नए बाजार उपलब्ध हो रहे हैं।

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