Manipur: 6 नगाओं की हत्या के बाद फिर भड़की हिंसा, नगालैंड के सीएम Rio ने चेताया
मणिपुर में छह नगा नागरिकों की निर्मम हत्या के बाद घाटी में सुरक्षा संकट और गहरा गया है, जिससे नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए न्याय की मांग की है...
-ममता सिंह, नई दिल्ली/इंफाल।
मणिपुर में शांति बहाली के तमाम प्रशासनिक और राजनीतिक दावे एक बार फिर मलबे में तब्दील हो गए हैं। मई 2023 से शुरू हुआ हिंसा का यह भयावह दौर साल 2026 में भी बदस्तूर जारी है। हाल ही में छह नगा नागरिकों की निर्मम हत्या ने राज्य को एक नए और अधिक खतरनाक त्रिकोणीय संघर्ष के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। 13 मई 2026 को लेइलोन वैफेई गांव से अगवा किए गए इन नगा पुरुषों के शव जैसे ही बरामद हुए, राजधानी इम्फाल का जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) छावनी में तब्दील हो गया। आक्रोशित जनता और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों तथा आंसू गैस के गोलों की गूंज ने साफ कर दिया है कि मणिपुर में मैतेई–कुकी संघर्ष अब केवल दो समुदायों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें नगा समुदाय की संवेदनशील कड़ियां भी जुड़ गई हैं।
यह ताजा उबाल दशकों पुराने भू–अधिकार, जनसांख्यिकीय असंतुलन, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से उपजे गहरे अविश्वास का परिणाम है। मणिपुर का भौगोलिक ढांचा ऐसा है जहां घाटी में बहुसंख्यक मैतेई रहते हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में कुकी और नगा आदिवासियों का दबदबा है। भूमि सुधार कानूनों और मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग ने इस खाई को इतना चौड़ा कर दिया है कि सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद उग्रवादी गुट समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर गंभीर चिंताएं जताई गईं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पूर्व में कुकी और मैतेई दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और सीमाओं को सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि खुफिया तंत्र की विफलता और उग्रवादियों के आधुनिक हथियारों ने प्रशासनिक नियंत्रण को पंगु बना दिया है। मणिपुर की यह त्रासदी अब केवल कानून–व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने–बाने पर एक गहरा जख्म बन चुकी है।
नगालैंड के सीएम नेफ्यू रियो की चेतावनी, ‘अमानवीय कृत्य‘ पर मांगा न्याय
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने मणिपुर में छह नगाओं की हत्या को एक ‘भयानक और अमानवीय कृत्य‘ करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश साझा किया। रियो ने खुलासा किया कि यह विश्वासघात तब हुआ जब नगा संगठनों ने मानवीय गरिमा का परिचय देते हुए अपनी हिरासत में लिए गए 14 कुकी बंधकों को चर्च और नागरिक समाज के प्रयासों के बाद सुरक्षित रिहा कर दिया था। मुख्यमंत्री ने खुद इस शांति वार्ता में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था। उन्होंने केंद्र और मणिपुर सरकार से मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए, क्योंकि सरकारी संस्थाओं और न्याय प्रणाली से जनता का उठ रहा भरोसा मणिपुर की पहले से ही नाजुक स्थिति को पूरी तरह तबाह कर देगा।