MP में क्लिन स्वीप: Congress की कानूनी नाकामी से भाजपा का निर्विरोध राज

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी और हाथ में सर्टिफिकेट: रिटर्निंग अफसर के फैसले से बदला मध्य प्रदेश का गणित...

राकेश प्रजापति, भोपाल।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला मुकाबला अब पूरी तरह खत्म हो गया है और भाजपा के तीनों प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद मैदान में केवल तीन ही उम्मीदवार शेष बचे थे, जिसके चलते रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया है। इस एकतरफा नतीजे के साथ ही भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है, जबकि कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े रणनीतिक और राजनीतिक झटके जैसा है।

इस पूरी स्थिति के पीछे कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होना है। भाजपा नेताओं की आपत्ति के बाद चुनाव आयोग ने उनके हलफनामे (फॉर्म 26) को अधूरा माना और उम्मीदवारी रद्द कर दी। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत से जुड़े नोटिस की जानकारी छिपाई है। हालांकि, कांग्रेस इस फैसले को शुरू से ही ‘संवैधानिक साजिश’ और ‘सीट की चोरी’ बता रही है। पार्टी की दलील है कि नटराजन को केवल एक ‘संज्ञान-पूर्व नोटिस’ (Pre-Cognizance Notice) मिला था, जिसे कानून की नजर में लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, क्योंकि अदालत ने इस पर कोई न्यायिक संज्ञान नहीं लिया था।

चुनाव आयोग से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने अब देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, हालांकि अदालत ने नतीजों की घोषणा पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। तकनीकी रूप से मध्य प्रदेश विधानसभा में 64 विधायकों के साथ कांग्रेस तीसरी सीट आसानी से जीतने की मजबूत स्थिति में थी, लेकिन नटराजन का पर्चा खारिज होने से पूरा चुनावी समीकरण ही बदल गया। अब जबकि भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, कांग्रेस की सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम कानूनी रुख पर टिकी हैं।

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