मुंबई। घरेलू शेयर बाजार के लिए बीता कारोबारी सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के कारण बाजार में लगातार अस्थिरता देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में पूरे सप्ताह तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहा।
सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई थी। सोमवार को सेंसेक्स 74,981 अंक तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 23,600 के स्तर को पार कर गया। हालांकि यह बढ़त ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। दिनभर की भारी मुनाफावसूली के चलते बाजार दबाव में आ गया और सेंसेक्स 508 अंकों की गिरावट के साथ 74,267 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक का उतार-चढ़ाव बाजार की अस्थिरता को दर्शाता रहा।
मंगलवार को निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे बाजार ने मजबूत वापसी की। सेंसेक्स 382 अंक चढ़कर 74,649 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ 23,483 अंक तक पहुंच गया। आईटी और बड़े शेयरों में खरीदारी का समर्थन बाजार को मिला।
हालांकि बुधवार को एक बार फिर वैश्विक संकेत कमजोर पड़ गए। अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 700 अंकों से अधिक टूट गया और अंततः 304 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।
गुरुवार और शुक्रवार को भी बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहा। निवेशकों की नजर विशेष रूप से आरबीआई की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बनी रही। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मुनाफावसूली के दबाव में सेंसेक्स 116 अंक गिरकर 74,243.34 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,366.70 अंक पर आ गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, एफआईआई की निवेश रणनीति और केंद्रीय बैंकों के फैसले बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर मजबूत और गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।