नई दिल्ली। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) के परिणामों में हो रही देरी का असर अब देश के सबसे बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) पर भी दिखाई देने लगा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया सीयूईटी-यूजी के परिणाम घोषित होने के बाद ही शुरू हो सकेगी। इससे एक बार फिर शैक्षणिक सत्र के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
डीयू की डीन ऑफ एडमिशन हनीत गांधी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रहा है। हालांकि, प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह सीयूईटी-यूजी के परिणामों पर निर्भर है। पहले अनुमान लगाया गया था कि पंजीकरण प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में शुरू हो सकती है, लेकिन परिस्थितियों के बदलने से यह संभव नहीं हो सका।
दरअसल, इस वर्ष सीयूईटी-यूजी परीक्षा तकनीकी समस्याओं से प्रभावित रही। 30 मई को तकनीकी खराबी के कारण परीक्षा संचालन में बाधा आई, जिसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। लगभग 3,700 से अधिक प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसी कारण परिणाम जारी होने की प्रक्रिया भी विलंबित हो गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2022 में सीयूईटी लागू होने के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय का शैक्षणिक कैलेंडर लगातार प्रभावित होता रहा है। वर्ष 2025 में कक्षाएं अगस्त की शुरुआत में शुरू हो गई थीं, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया सितंबर के अंत तक जारी रही। वहीं 2024 में भी परिणामों में देरी के चलते सत्र अगस्त के अंत में शुरू हुआ और प्रवेश प्रक्रिया अक्टूबर तक चली थी।
विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। कुछ शिक्षकों ने कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश की पुरानी व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता भी जताई है। उनका मानना है कि लगातार हो रही देरी से छात्रों और शिक्षकों दोनों की शैक्षणिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।