सीजफायर के बाद भी बढ़ा तनाव! कुवैत एयरपोर्ट विवाद पर आमने-सामने आए अमेरिका और ईरान

 तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्धविराम की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को हुए नुकसान और ओमान सागर में अमेरिकी युद्धपोत पर कथित हमले के दावों ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। हालात ऐसे समय में बिगड़ते दिख रहे हैं जब क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान जारी कर कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को हुए नुकसान में किसी भी तरह की ईरानी भूमिका से इनकार किया है। आईआरजीसी के अनुसार, एयरपोर्ट को पहुंची क्षति किसी सैन्य कार्रवाई का परिणाम नहीं, बल्कि अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम में आई तकनीकी खराबी का नतीजा थी। ईरान ने कहा कि उसके सैन्य बलों का इस घटना से कोई संबंध नहीं है और उस पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

वहीं, ओमान सागर में अमेरिकी युद्धपोत पर कथित हमले को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। ईरानी मीडिया में दावा किया गया कि ईरानी नौसेना ने एक अमेरिकी सैन्य पोत को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर ईरानी जलक्षेत्र के करीब पहुंच गया था और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में काम कर रहा था। हालांकि अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ईरान का दावा भ्रामक और तथ्यहीन है। अमेरिकी सैन्य जहाज पूरी तरह सुरक्षित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपने नियमित अभियान चला रहे हैं।

इस बीच, इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम को लेकर एक नए समझौते की घोषणा हुई है। अमेरिका के अनुसार, दोनों पक्ष युद्धविराम की शर्तों पर सहमत हो गए हैं। समझौते में हिजबुल्लाह द्वारा गोलाबारी रोकने और दक्षिण लितानी क्षेत्र से अपने लड़ाकों को हटाने जैसी शर्तें शामिल हैं।

हालांकि शांति समझौते के बावजूद क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आगामी 22 जून को प्रस्तावित उच्च स्तरीय वार्ता में स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता विवाद पश्चिम एशिया में स्थिरता की राह को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

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