चारधाम यात्रा में क्यों बिगड़ रहे हालात? श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी चुनौती

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार भारी भीड़ और अव्यवस्थाओं के कारण लगातार चर्चा में बनी हुई है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या पहुंचने से यात्रा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऑल वेदर रोड और सड़क चौड़ीकरण जैसी बड़ी परियोजनाओं के बावजूद घंटों लंबे जाम और अव्यवस्था से श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

चारधाम यात्रा शुरू हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं दिख रहे। मैदानों में बढ़ती गर्मी के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। यात्रा मार्गों पर तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ घूमने और रील बनाने वाले पर्यटकों की भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इससे यात्रा मार्गों और धामों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन के साथ अर्द्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर जाम और भीड़ की समस्या बनी हुई है। खासकर केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में प्रतिदिन 15 से 30 हजार तक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जबकि वहां आवास, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था सीमित है।

जानकारों का मानना है कि यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या पर लगी सीमा हटाना अव्यवस्था का बड़ा कारण बन गया है। पहले धामों की क्षमता के अनुसार सीमित संख्या में यात्रियों को भेजा जाता था, लेकिन व्यापारिक हितों और विरोध प्रदर्शनों के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इसका असर अब यात्रा प्रबंधन पर साफ दिखाई दे रहा है।

कई श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ रहा है, जबकि एडवांस बुकिंग होने के बावजूद यात्री होटल तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को यात्रा मार्गों की वास्तविक क्षमता के अनुसार ही निर्णय लेने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके और देवभूमि उत्तराखंड की “अतिथि देवो भवः” की परंपरा कायम रह सके।

Leave A Reply

Your email address will not be published.