— पिछला दौरा टलने के बाद 17 जुलाई के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह
— रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों से सत्ताधारी भाजपा खेमे में अंदरूनी बेचैनी बढ़ी
कृति सिंह /देहरादून
लोकसभा चुनाव के बाद बदले हुए सियासी परिदृश्य के बीच, लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की देहरादून यात्रा उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून के परेड ग्राउंड में युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करेंगे।
इससे पहले जून की शुरुआत में खराब मौसम के कारण अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल का उनका दौरा टल गया था, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जो मायूसी थी, वह अब इस नई घोषणा से भारी उत्साह में बदल चुकी है। साल 2027 के शुरुआती महीनों में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस यात्रा को कांग्रेस के चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है।
राहुल गांधी के इस आक्रामक तेवर और सीधे युवा कनेक्ट ने निश्चित रूप से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में अंदरूनी बेचैनी को हवा दी है।हालांकि भाजपा सार्वजनिक रूप से इसे ‘राजनीतिक पर्यटन’ करार दे रही है, लेकिन अंदरखाने एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) और विधायकों की परफॉर्मेंस को लेकर मंथन तेज हो गया है। बीजेपी ने हाल ही में ‘मिशन 2027’ के लिए आंतरिक सर्वे शुरू किया है, जिससे कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की आशंका गहरा गई है।
उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक, अंकिता भंडारी मामले को लेकर उपजा जनाक्रोश और हाल ही में केदारनाथ-बदरीनाथ मंदिर समिति में सामने आए वित्तीय भ्रष्टाचार के मामलों ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ छवि को थोड़ा असहज किया है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा ठीक संसद के मानसून सत्र से पहले रोजगार और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाना भाजपा के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से यह दौरा उत्तराखंड कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। लंबे समय से गुटबाजी और सांगठनिक शिथिलता से जूझ रही प्रदेश कांग्रेस को राहुल गांधी के आने से एक नई दिशा और एकजुटता मिलने की उम्मीद है। कोटा के बाद देहरादून को इस युवा विमर्श के लिए चुनना यह दिखाता है कि कांग्रेस उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और बड़े वोट बैंक यानी युवाओं को अपने पाले में करना चाहती है। अग्निवीर योजना को लेकर उत्तराखंड के पहाड़ों में युवाओं और पूर्व सैनिकों के भीतर पहले से ही एक सुलगती हुई नाराजगी है राहुल गांधी की यह यात्रा इन सभी स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर लाकर कांग्रेस के पक्ष में एक मजबूत नैरेटिव सेट करने का काम करेगी।
इस यात्रा का सबसे बड़ा विश्लेषणात्मक पहलू यह है कि यह सीधे तौर पर 2027 के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगी। उत्तराखंड की राजनीति में युवा और महिला मतदाता हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। कांग्रेस इस संवाद के जरिए खुद को युवाओं की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहती है। पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में कथित ‘अवैध वसूली तंत्र’ जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रहार करके राहुल गांधी सीधे तौर पर मध्यवर्गीय परिवारों की दुखती रग पर हाथ रख रहे हैं। यदि कांग्रेस इस माहौल को अगले डेढ़ साल तक जमीन पर बनाए रखने में सफल रहती है, तो 2027 में भाजपा के ‘तीसरी बार सरकार’ बनाने के सपने की राह बेहद कठिन हो जाएगी और सत्ता परिवर्तन की पटकथा यहीं से लिखी जा सकती है।