हैदराबाद। भारत ने अंतरिक्ष और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्काईरूट एयरोस्पेस के पूर्व अधिकारियों द्वारा स्थापित स्टार्टअप ‘रेड बैलून एयरोस्पेस’ ने विजयवाड़ा से देश का पहला स्वदेशी सुपर प्रेशर बैलून सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है।
कंपनी ने हाल ही में इस सुपर प्रेशर बैलून के टेथर्ड ट्रायल पूरे किए थे और अब इसका पहला मिशन लॉन्च किया गया है। स्टार्टअप का लक्ष्य बैलून को लगातार 24 घंटे तक स्ट्रैटोस्फीयर में उड़ाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना है। यह बैलून धरती से करीब 20 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। यह ऊंचाई सामान्य विमानों की सीमा से ऊपर और उपग्रहों की कक्षा से नीचे मानी जाती है।
सुपर प्रेशर बैलून को अत्याधुनिक पॉलिमर नैनोकॉम्पोजिट सामग्री से तैयार किया गया है। इसमें हल्की-से-हवा तकनीक के तहत हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, दिशा और निगरानी के लिए आधुनिक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) मॉड्यूल लगाया गया है।
करीब 50 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम इस बैलून के पहले मिशन में छह पेलोड भेजे गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम भी शामिल है, जो 25 से 75 सेंटीमीटर तक की बेहद साफ तस्वीरें लेने में सक्षम बताया गया है।
कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ डॉ. सीवीएस किरण के अनुसार, यह तकनीक दिन-रात निगरानी करने में सक्षम होगी। वहीं, सह-संस्थापक और सीओओ सिरीश पल्लिकोंडा ने बताया कि इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों में संचार सेवाएं पहुंचाने, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक निगरानी और रणनीतिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
कंपनी का दावा है कि यह तकनीक सैटेलाइट की तुलना में कम लागत और कम समय में तैनात की जा सकती है तथा इसे दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है।