पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अज़हा से पहले मुस्लिम धार्मिक संगठनों, उलेमा और सामाजिक नेताओं ने लोगों से शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में धार्मिक नेताओं ने कुर्बानी, ईद की नमाज़, लाउडस्पीकर और प्रशासनिक नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
धार्मिक नेताओं ने मुसलमानों से राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और स्थानीय निकायों के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल सरकारी नियमों और प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार ही की जानी चाहिए। साथ ही साफ-सफाई और पर्यावरणीय नियमों का पालन करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कुछ उलेमा और संगठनों ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए इस बार गाय की कुर्बानी से बचने और वैध अन्य जानवरों की कुर्बानी देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से बचना सभी की जिम्मेदारी है। धार्मिक नेताओं ने यह भी कहा कि ईद की नमाज़ केवल मस्जिदों और निर्धारित ईदगाहों में ही अदा की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर प्रशासन की अनुमति लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
लाउडस्पीकर को लेकर भी अदालत और सरकार द्वारा तय नियमों का पालन करने की अपील की गई। नेताओं ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भड़काऊ पोस्टों से दूर रहने को कहा।
इस बीच ईद-उल-अज़हा की छुट्टियों को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पहले दो दिन की छुट्टी दी जाती थी, जबकि अब इसे घटाकर एक दिन कर दिया गया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर ईद की नमाज़ को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की, जबकि भारतीय जनता पार्टी पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया।
वहीं नौशाद सिद्दीकी और अन्य नेताओं ने लोगों से धैर्य और शांति बनाए रखने की अपील की। राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने कहा कि त्योहारों को राजनीति से दूर रखते हुए आपसी सम्मान और भाईचारे के साथ मनाया जाना चाहिए।