जब लोकतंत्र में उतर आए ‘कॉकरोच’, व्यंग्य में नेताओं पर सबसे बड़ा कटाक्ष

लोकतंत्र और राजनीति पर तीखा कटाक्ष करता एक व्यंग्य लेख इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ व्यंग्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने अपने लेख “लोकतंत्र की नई सोच…कॉकरोच” में वर्तमान राजनीति की विसंगतियों को अनोखे और हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया है। लेख में कॉकरोच को आदर्श राजनेता बताते हुए राजनीति की कई कड़वी सच्चाइयों पर व्यंग्य किया गया है।

लेख में कहा गया है कि कॉकरोच ऐसा जीव है जो परमाणु हमले तक से बच सकता है, इसलिए वह राजनीति के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार साबित हो सकता है। लेखक ने तंज कसते हुए लिखा कि जिस जीव पर एटम बम का असर नहीं होता, उस पर विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव या टीवी डिबेट की बहसों का क्या असर होगा। इस बहाने नेताओं की “मोटी चमड़ी” और सत्ता से चिपके रहने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया गया है।

व्यंग्य में दल-बदल की राजनीति को भी निशाने पर लिया गया है। लेखक ने लिखा कि आज के नेताओं को पाला बदलने के लिए रिसॉर्ट और चार्टर्ड प्लेन की जरूरत पड़ती है, जबकि कॉकरोच बिना किसी विचारधारा के सिर्फ वहां पहुंच जाते हैं जहां “गंदगी” ज्यादा हो। “जिधर गंदगी, उधर हम” जैसे संवादों के जरिए राजनीति में अवसरवाद पर करारा हमला किया गया है।

लेख में वीआईपी संस्कृति और नेताओं की सुविधाओं पर भी तंज कसा गया है। इसमें कहा गया कि कॉकरोच नेताओं को न बंगला चाहिए, न सुरक्षा और न ही विशेष सुविधाएं। वे चुपचाप अंधेरे में काम करते हैं और संसद की कैंटीन का बचा खाना खाकर भी “देश सेवा” कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर कटाक्ष करते हुए लेखक ने कल्पना की है कि यदि संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कोई कॉकरोच करे तो केवल उसकी मौजूदगी ही दूसरे देशों को डराने के लिए काफी होगी।

यह व्यंग्य लेख सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे मौजूदा राजनीति पर सबसे चुटीला और तीखा कटाक्ष बता रहे हैं।

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