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हिंदी व्यंग्य लेख

जब लोकतंत्र में उतर आए ‘कॉकरोच’, व्यंग्य में नेताओं पर सबसे बड़ा कटाक्ष

लोकतंत्र और राजनीति पर तीखा कटाक्ष करता एक व्यंग्य लेख इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ व्यंग्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने अपने लेख “लोकतंत्र की नई सोच...कॉकरोच” में वर्तमान राजनीति की विसंगतियों को अनोखे और हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया है। लेख में कॉकरोच को आदर्श राजनेता बताते हुए…
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अगर कवि बन जाए देश का प्रधानमंत्री, तो कैसी होगी सरकार?

कल्पना कीजिए एक ऐसे देश की, जहां शासन की कमान किसी अनुभवी राजनेता के बजाय एक लोकप्रिय मंचीय कवि के हाथों में हो। जहां संसद की गंभीर बहसें ‘कवि सम्मेलन’ में बदल जाएं और सरकारी फैसले फाइलों में नहीं, बल्कि तुकबंदी में लिखे जाएं। यह व्यंग्यात्मक परिदृश्य भले ही काल्पनिक हो, लेकिन अपने अंदाज में कई गहरे…
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