नई दिल्ली, भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद अहम माने जा रहे एलसीए तेजस मार्क-1ए प्रोजेक्ट में एक बार फिर देरी होती नजर आ रही है। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को मई महीने में भारतीय वायुसेना के सामने तेजस मार्क-1ए की प्रगति को लेकर प्रस्तुति देनी थी, लेकिन डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े कुछ कार्य अधूरे रहने के कारण यह अहम बैठक टाल दी गई। अब इस समीक्षा बैठक के जून में होने की संभावना जताई जा रही है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार तेजस मार्क-1ए के रडार प्रदर्शन और कुछ अन्य सिस्टम्स में अभी सुधार का काम चल रहा है। वायुसेना पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसकी ऑपरेशनल जरूरतों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि कुछ सीमित तकनीकी राहत पर विचार संभव है। अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय को लेना होगा, क्योंकि एचएएल और मंत्रालय के बीच ही यह अनुबंध हुआ है।
भारतीय वायुसेना ने एचएएल के साथ 83 तेजस मार्क-1ए विमानों की डील की थी, लेकिन अब तक एक भी विमान की डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी है। इसके अलावा 97 अतिरिक्त विमानों की खरीद का समझौता भी किया जा चुका है। इन विमानों के जरिए कुल 9 नए फाइटर स्क्वॉड्रन तैयार किए जाने हैं।
एचएएल के पूर्व सीएमडी D K Sunil ने पहले जानकारी दी थी कि 21 विमान तैयार हैं और उनके इंजन परीक्षण भी पूरे हो चुके हैं। बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार इंटीग्रेशन पर भी काफी काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन कुछ तकनीकी सुधार अभी बाकी हैं।
अब एचएएल द्वारा तैयार विमानों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद वायुसेना के टेस्ट पायलट उड़ान परीक्षण करेंगे। इन परीक्षणों में विमान के एएसओआर मानकों पर खरा उतरने की जांच होगी। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो एचएएल को उसमें सुधार करना होगा।
गौरतलब है कि मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के अनुसार भारतीय वायुसेना को 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल उसके पास केवल 29 स्क्वॉड्रन ही मौजूद हैं। ऐसे में तेजस प्रोग्राम भारतीय वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।