हल्द्वानी। उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। घने जंगलों से निकलकर टाइगर, गुलदार, भालू और हाथियों का आबादी वाले इलाकों की ओर आना लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने वन विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। विभाग अब वन्यजीवों की गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से नजर रख रहा है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।
Himanshu Bangari ने बताया कि तराई क्षेत्र वन्यजीवों के लिहाज से बेहद संवेदनशील और समृद्ध इलाका है। यहां बड़ी संख्या में वन्यजीव निवास करते हैं और जंगलों से सटे क्षेत्रों में लोगों की आबादी भी काफी अधिक है। कई बार ग्रामीण जंगलों में आवाजाही करते हैं, जिससे अचानक वन्यजीवों से सामना होने पर हादसे हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। जहां कहीं भी वन्यजीव आबादी वाले इलाकों में दिखाई देते हैं, वहां तुरंत रेस्क्यू टीम भेजी जाती है। हाल ही में जंगल किनारे रहने वाले लोगों को रात के समय सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़ी संख्या में टॉर्च भी वितरित की गई हैं।
डीएफओ के अनुसार जिन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक देखी जा रही हैं, वहां पिंजरे लगाए जा रहे हैं और कैमरा ट्रैप के जरिए उनकी निगरानी की जा रही है। हाल ही में भालू के हमले में हुई एक व्यक्ति की मौत के बाद संबंधित इलाके में विशेष निगरानी शुरू की गई है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि हमला करने वाला भालू कौन था और उसकी गतिविधियां किस क्षेत्र में हैं।
वन विभाग ने यह भी माना कि खुले में फेंका जा रहा कूड़ा वन्यजीवों को आबादी की ओर आकर्षित कर रहा है। खासकर सिडकुल से लगे क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कूड़े का सही निस्तारण करें और जंगल में अकेले न जाएं।
वन विभाग ने सलाह दी है कि अंधेरे में टॉर्च का इस्तेमाल करें और चलते समय हल्की आवाज करते रहें, ताकि वन्यजीवों से अचानक सामना होने से बचा जा सके।