देहरादून। बारिश के मौसम से पहले देहरादून जिला प्रशासन ने डेंगू और अन्य जल जनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी Savin Bansal ने ऋषिपर्णा सभागार में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर डेंगू नियंत्रण के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने साफ कहा कि डेंगू रोकथाम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू जांच के लिए रैपिड टेस्ट, एलिसा टेस्ट किट, पर्याप्त दवाइयां, बेड, ब्लड बैंक और चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू का कोई भी मामला सामने आने पर तुरंत पूरी मशीनरी सक्रिय होनी चाहिए। देहरादून और ऋषिकेश नगर क्षेत्रों में आशा कार्यकत्रियों को वार्डवार जिम्मेदारी देकर डोर-टू-डोर सर्वे कराने और हॉटस्पॉट इलाकों में वॉलिंटियर्स तथा रैपिड रिस्पांस टीम तैनात करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने स्कूलों में भी डेंगू जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। बच्चों के लिए फूल बाजू की ड्रेस अनिवार्य करने और स्कूलों में एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नगर निगम के कूड़ा वाहनों के माध्यम से डेंगू से बचाव के संदेश प्रसारित किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने नगर निगम को रिस्पना और बिंदाल नदी सहित शहर के सभी नालों और ड्रेनों की सफाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। डेंगू हॉटस्पॉट क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग, लार्विसाइड छिड़काव और जलभराव रोकने पर विशेष फोकस रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गंदगी या डेंगू लार्वा मिलने पर चालान काटने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि बंजारावाला, क्लेमेंटाउन, कार्गी और राजस्थानी बस्ती जैसे क्षेत्र मच्छर प्रजनन के लिहाज से संवेदनशील हैं। वर्ष 2023 में जिले में 1201 डेंगू मामले सामने आए थे, जबकि इस वर्ष अब तक पांच मामले दर्ज किए जा चुके हैं।