पश्चिम बंगाल के पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद जिले की खुली सीमा पर कंटीले तार लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शनिवार को हबीबपुर ब्लॉक के भवानीपुर और आग्रा हरिश्चंद्रपुर क्षेत्रों में भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र की जमीनों का निरीक्षण करते हुए दस्तावेजों की जांच और मापजोक शुरू की।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई करीब 172 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 33 किलोमीटर क्षेत्र अब भी बिना कंटीले तार के खुला पड़ा है। सबसे अधिक खुला हिस्सा हबीबपुर ब्लॉक में स्थित है, जहां करीब 20 से 25 किलोमीटर तक अब तक फेंसिंग नहीं हो सकी है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासन को लगभग 260 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। फिलहाल करीब 10 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय में सीमा सुरक्षा बल और जिला प्रशासन के बीच एक अहम बैठक हुई थी। इसी बैठक के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी स्वपन तरफदार ने बताया कि विभागीय कर्मचारी किसानों से जमीन से जुड़े दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं और जल्द ही पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
सीमावर्ती किसानों ने प्रशासन की इस पहल का समर्थन किया है। किसानों का कहना है कि खुली सीमा के कारण लंबे समय से फसल चोरी और लूटपाट जैसी घटनाएं होती रही हैं। उनका मानना है कि कंटीले तार लगने से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगेगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जुएल मुर्मू ने आरोप लगाया कि पूर्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान वोटबैंक की राजनीति के कारण सीमा पर फेंसिंग का काम अटका रहा, जबकि अब राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।