नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच मजबूत होते रिश्तों की झलक राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य राजकीय भोज में देखने को मिली। भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने वियतनाम के राष्ट्रपति Tô Lâm के सम्मान में आयोजित विशेष डिनर में भारतीय संस्कृति, परंपरा और विविधता का अनूठा संगम पेश किया। इस दौरान बिहार और महाराष्ट्र के पारंपरिक व्यंजनों ने खास आकर्षण बटोरा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने वियतनाम को भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और इंडो-पैसिफिक विजन का महत्वपूर्ण साझेदार बताया। राष्ट्रपति टो लैम की भारत यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति लैम को भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक उपलब्धियों से जुड़े तीन विशेष उपहार भी भेंट किए गए। इनमें सबसे खास “नमोह 108” नामक कमल की दुर्लभ प्रजाति रही, जिसे National Botanical Research Institute ने विकसित किया है। इस कमल में 108 पंखुड़ियां हैं, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती हैं।
इसके अलावा मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा तैयार की गई पीतल की बोधि वृक्ष प्रतिमा और वाराणसी की प्रसिद्ध रेशमी बुनाई वाला विशेष कपड़ा भी उपहार स्वरूप दिया गया।
राष्ट्रपति भवन के भोज में बिहार और महाराष्ट्र के पारंपरिक स्वादों ने मेहमानों का दिल जीत लिया। बिहार से जीआई टैग प्राप्त सिलाओ खाजा, गया का अनरसा, मिथिला का मखाना और हाजीपुर का मालभोग केला परोसा गया। वहीं महाराष्ट्र से रत्नागिरी के मशहूर अल्फांसो आम और पौष्टिक मिलेट बार शामिल किए गए।
यह डिनर केवल राजनयिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कला और क्षेत्रीय स्वादों का भव्य प्रदर्शन भी बना।