देहरादून में सुरक्षा पर सियासत तेज, गरिमा दसौनी ने उठाए गंभीर सवाल

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के संवेदनशील क्षेत्र के पास प्रस्तावित मॉल और रिहायशी परिसर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और प्रशासन को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

दसौनी ने कहा कि यह मामला भाजपा सरकार की नीतियों और नीयत दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले धौलास क्षेत्र को लेकर भाजपा नेताओं ने “मुस्लिम विश्वविद्यालय” और “जनसांख्यिकीय बदलाव” जैसे मुद्दों पर राजनीतिक माहौल बनाया, लेकिन अब जब आईएमए की सुरक्षा से जुड़ा वास्तविक मामला सामने आया है, तो सरकार चुप्पी साधे हुए है।

उन्होंने बताया कि आईएमए अधिकारियों द्वारा राज्य प्रशासन और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को भेजे गए पत्रों में पंडितवाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण को सुरक्षा मानकों के खिलाफ बताया गया है। रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार सैन्य प्रतिष्ठानों के 100 से 500 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण के लिए स्थानीय सैन्य प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के ही परियोजना को स्वीकृति दे दी गई।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि आईएमए ने स्पष्ट रूप से इस निर्माण को सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम उठाया गया है।

दसौनी ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां 15 किलोमीटर दूर के मुद्दों को सुरक्षा से जोड़कर राजनीति की गई, वहीं आईएमए के पास संभावित खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, बिना एनओसी दी गई सभी अनुमतियां तत्काल रद्द की जाएं और आईएमए की आपत्तियों का समाधान करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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