फॉरेस्ट फायर रोकने की नई रणनीति, पिरूल ब्रिकेट से बदलेगी तस्वीर

देहरादून। प्रदेश में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सरकार अब अधिक सक्रिय नजर आ रही है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फायर सीजन शुरू होने से पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि आग की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वनाग्नि से जुड़े सभी विभागों, समितियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ जनवरी तक अनिवार्य रूप से बैठकें आयोजित की जाएं। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगे फायर हाइड्रेंट्स को प्रभावी बनाने के लिए डेडिकेटेड प्रेशर पाइपलाइन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। इस संबंध में पेयजल विभाग को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग को निर्देशित किया गया कि विशेष अभियान चलाकर आग से बचाव से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जाए। वाहनों और उपकरणों की समय पर मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ ही सभी लीसा डिपो में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

इसके अलावा, मुख्य सचिव ने वन, मौसम और वन सर्वेक्षण संस्थानों को मिलकर फॉरेस्ट फायर का प्रिडिक्शन मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए। इससे आग लगने की संभावनाओं का पूर्वानुमान लगाकर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

बैठक में पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) के निस्तारण और उससे ब्रिकेट उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि पिरूल से बने ब्रिकेट को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रदेश में अधिक यूनिट स्थापित की जाएं। इससे न केवल वनाग्नि की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि इस पहल को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है, साथ ही इसे कार्बन क्रेडिट से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जाए।

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