असम चुनाव 2026: विकास बनाम पहचान—कौन जीतेगा निर्णायक जंग?

असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाला विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम मोड़ साबित होने जा रहा है। 126 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में करीब 2.5 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह चुनाव केवल सरकार बदलने या बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि राज्य विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान के बीच किस दिशा को प्राथमिकता देता है। मतगणना 4 मई को होगी, लेकिन चुनावी सरगर्मी पहले ही चरम पर पहुंच चुकी है।

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में Bharatiya Janata Party लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है। पार्टी अपने संकल्प पत्र में विकास, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं को प्रमुखता दे रही है। सरकार का दावा है कि लाखों युवाओं को रोजगार दिया गया है और आगे भी बड़े स्तर पर नौकरियां सृजित की जाएंगी। ‘अरुणोदय योजना’ के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता और चाय बागान मजदूरों के लिए भूमि अधिकार जैसे मुद्दों को भी उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है।

दूसरी ओर Indian National Congress और उसके सहयोगी दल इस चुनाव को बदलाव के अवसर के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस ने सरकार पर बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ‘जनता का आरोप-पत्र’ जारी किया है। विपक्षी गठबंधन में क्षेत्रीय दलों की मौजूदगी मुकाबले को और दिलचस्प बना रही है, हालांकि वोटों के बिखराव की चुनौती भी बनी हुई है।

कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा और त्रिकोणीय होता दिख रहा है। खासकर जालुकबारी, जोरहाट और सिबसागर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की छवि निर्णायक साबित हो सकती है। सिबसागर में Akhil Gogoi की सक्रियता भी चर्चा में है।

इस चुनाव में नागरिक समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण बन गई है। कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील की है। कुल मिलाकर यह चुनाव स्थिरता बनाम बदलाव की सीधी टक्कर बन चुका है। अब फैसला जनता के हाथ में है कि वह निरंतरता को चुनेगी या नई दिशा को।

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