उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर सियासी घमासान, क्या धामी सरकार लेगी बड़ा फैसला?

देहरादून,   उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। ग्रीष्मकालीन राजधानी भराणीसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान रुद्रपुर से भाजपा विधायक Shiv Arora द्वारा इस कानून को लागू करने की मांग उठाए जाने के बाद यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।

विधायक शिव अरोरा ने सदन में राज्य की बदलती जनसंख्या संरचना पर चिंता जताते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय असंतुलन भविष्य में गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि तीन से अधिक बच्चों वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाए, ताकि संसाधनों पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित किया जा सके। उनके इस प्रस्ताव को भाजपा के कुछ अन्य विधायकों का समर्थन भी मिला है।

हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे का विरोध किया है। कांग्रेस विधायक Qazi Mohammad Nizamuddin ने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रस्ताव एक विशेष वर्ग को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाए जाते हैं। उन्होंने इसे संकीर्ण सोच करार देते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

इस बीच मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने इस विषय पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल किसी जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय व्यापक वैचारिक मंथन की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव संबंधित विधायक का व्यक्तिगत विचार है, जिसे सरकार के समक्ष रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून एक जटिल और संवेदनशील नीति विषय है, जिस पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर गहन चर्चा जरूरी है। यदि राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो उसे विधायी और नीतिगत स्तर पर व्यापक तैयारी करनी होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस तरह के कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति अहम हो सकती है। फिलहाल यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में गर्माया हुआ है और आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला संभव है।

 

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