आईआईटी गुवाहाटी का बड़ा शोध: ऐसा सीमेंट तैयार जो परमाणु विकिरण को भी रोक सके

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार दुनिया में परमाणु ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ सुरक्षा का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है। परमाणु संयंत्रों और विकिरण से जुड़ी सुविधाओं में सबसे बड़ी चुनौती ऐसे निर्माण सामग्री की होती है जो न केवल मजबूत हो बल्कि खतरनाक विकिरण को प्रभावी ढंग से रोक भी सके। इसी दिशा में भारत के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

Indian Institute of Technology Guwahati (आईआईटी गुवाहाटी) के शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार का  विकिरण-रोधी सीमेंट मॉर्टार विकसित किया है, जो गामा किरणों और न्यूट्रॉन जैसे खतरनाक विकिरण को रोकने की क्षमता रखता है। यह नई तकनीक परमाणु रिएक्टरों, कंटेनमेंट स्ट्रक्चर्स और मेडिकल रेडिएशन सुविधाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने इस सीमेंट मॉर्टार को तैयार करने के लिए चार प्रकार के माइक्रोपार्टिकल्स का उपयोग किया है— बोरॉन ऑक्साइड, लेड ऑक्साइड, बिस्मथ ऑक्साइड और टंगस्टन ऑक्साइड । इन सूक्ष्म कणों को सावधानीपूर्वक मिश्रित कर ऐसा मॉर्टार तैयार किया गया है जो संरचनात्मक मजबूती के साथ-साथ विकिरण से सुरक्षा भी प्रदान करता है।

अध्ययन के दौरान पाया गया कि 28 दिनों के बाद इस मॉर्टार की **कम्प्रेसिव स्ट्रेंथ में उल्लेखनीय वृद्धि** देखी गई। विभिन्न माइक्रोपार्टिकल्स ने अलग-अलग तरीके से इसकी क्षमता को बेहतर बनाया। उदाहरण के लिए, लेड ऑक्साइड ने मॉर्टार को अधिक घना और मजबूत बनाया, जबकि टंगस्टन ऑक्साइड ने क्रैकिंग रेसिस्टेंस बढ़ाते हुए इसकी टिकाऊ क्षमता में सुधार किया। वहीं बोरॉन ऑक्साइड ने विकिरण को अवशोषित करने की क्षमता को काफी बढ़ाया।

इन सभी तत्वों के संयुक्त प्रभाव से तैयार मॉर्टार में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम रेडिएशन प्रोटेक्शन की क्षमता विकसित हुई है, यानी यह एक साथ कई प्रकार की विकिरण तरंगों को रोक सकता है। इससे परमाणु संयंत्रों में विकिरण लीक का खतरा कम होगा और कंटेनमेंट संरचनाएं अधिक सुरक्षित और दीर्घकालिक बन सकेंगी।

इस शोध का नेतृत्व कर रहे Hrishikesh Sharma, जो सिविल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, का कहना है कि परमाणु अवसंरचना की सुरक्षा पूरी तरह कंटेनमेंट सामग्री की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उनके अनुसार सावधानीपूर्वक डिजाइन किए गए माइक्रोपार्टिकल-मॉडिफाइड सीमेंट मॉर्टार से संरचनात्मक मजबूती और विकिरण सुरक्षा दोनों को एक साथ बेहतर बनाया जा सकता है।

यह महत्वपूर्ण शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल Materials and Structures में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में आईआईटी गुवाहाटी के रिसर्च स्कॉलर संचित सक्सेना के अलावा CSIR-Central Building Research Institute, रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. सुमन कुमार भी सह-लेखक के रूप में शामिल रहे।

परमाणु सुरक्षा के महत्व को समझने के लिए इतिहास के दो बड़े हादसों को याद करना जरूरी है— Chernobyl Disaster (1986) और Fukushima Nuclear Disaster (2011)। इन घटनाओं ने दुनिया को यह सिखाया कि परमाणु संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले निर्माण सामग्री की मजबूती और सुरक्षा कितनी अहम होती है।

आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से निपटने और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब ऐसी तकनीकें अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती हैं। आईआईटी गुवाहाटी का यह शोध इसी दिशा में भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

शोधकर्ताओं की टीम अब इस मॉर्टार को फुल कंक्रीट मिक्स में विकसित करने और रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट संरचनाओं पर इसके विस्तृत परीक्षण की योजना बना रही है। इसके लिए न्यूक्लियर ऊर्जा एजेंसियों, निर्माण सामग्री कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर संगठनों के साथ सहयोग की संभावना भी तलाश की जा रही है।

निस्संदेह यह शोध केवल एक नई निर्माण सामग्री का विकास नहीं है, बल्कि परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

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