नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। सत्र के पहले ही दिन विपक्षी दलों ने **पश्चिम एशिया** में बढ़ते तनाव और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय स्थिति को लेकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
विरोध प्रदर्शन में **भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस** के अध्यक्ष **मल्लिकार्जुन खरगे**, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष **राहुल गांधी**, कांग्रेस महासचिव **केसी वेणुगोपाल**, सांसद **प्रियंका गांधी** और **किशोरी लाल शर्मा** समेत कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। सभी नेताओं ने **संसद भवन** परिसर के मकर द्वार पर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर थे, जिन पर सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। सांसदों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में **अमेरिका**, **इजराइल** और **ईरान** के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है और इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने की आशंका है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करे और देश को बताए कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष पहले से ही महंगाई, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय हालात जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में सत्र के शुरुआती दिन से ही संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।