देहरादून। प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रत्येक जनपद में एक-एक मॉडल सहकारिता गांव स्थापित करने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द जमीन पर उतारने के लिए विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
अपने शासकीय आवास पर आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. रावत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संस्कृत गांव की तर्ज पर सहकारिता आधारित मॉडल गांव विकसित किए जाएं। इन गांवों में सहकारी बैंक, सीएससी सेंटर और सहकारी बाजार की स्थापना की जाएगी। सहकारी बाजार के माध्यम से स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों और ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल को बढ़ावा देना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजना का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डॉ. रावत ने सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण पर गुजरात भेजने के निर्देश दिए। इस भ्रमण में विशेष रूप से नवगठित और प्रारंभिक अवस्था में कार्य कर रही समितियों के सचिवों को प्राथमिकता दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि वे वहां के सफल सहकारी मॉडलों का अध्ययन कर अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कार्यप्रणाली लागू कर सकें।
सरकार की इस पहल से प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।