देहरादून। प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नई दिल्ली में प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर विभागीय तैयारियों की गहन समीक्षा की। अपने शासकीय आवास पर आयोजित संयुक्त बैठक में उन्होंने दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रस्तुतीकरण भारत सरकार के एजेंडे के अनुरूप, अद्यतन आंकड़ों और ठोस तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा की जानी है, ऐसे में राज्य की उपलब्धियों, नवाचारों और भविष्य की कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण में शामिल किया जाए। उन्होंने परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष जोर दिया।
उच्च शिक्षा के तहत डॉ. रावत ने राजकीय महाविद्यालयों में तैनात फैकल्टी, छात्र संख्या, आधारभूत संरचना, पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों, इंटरनेट सेवाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य संसाधनों का विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किए गए पाठ्यक्रम सुधार, नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) के अनुरूप क्रेडिट संरचना, भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पाठ्यक्रम, कौशल विकास कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटलीकरण जैसे विषयों को प्राथमिकता से शामिल करने को कहा।
विद्यालयी शिक्षा की समीक्षा करते हुए मंत्री ने 8 मार्च तक सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत शौचालय व्यवस्था सुनिश्चित करने और 1 अप्रैल तक प्रत्येक विद्यालय में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त राजकीय विद्यालयों में पूर्ण विद्युतीकरण, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था और आईसीटी लैब निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा।
डॉ. रावत ने शिक्षकों के त्रिस्तरीय ढांचा संबंधी प्रस्ताव को शीघ्र कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।