क्या मेनका गुरुस्वामी बनेंगी देश की पहली समलैंगिक सांसद? तृणमूल का बड़ा दांव

कोलकाता,  तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी को अपना उम्मीदवार घोषित कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। यदि वह निर्वाचित होती हैं, तो वह देश की पहली समलैंगिक सांसद बनकर इतिहास रचेंगी। उनकी उम्मीदवारी को भारतीय राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मेनका गुरुस्वामी देश की प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों में गिनी जाती हैं। उन्होंने बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे शीर्ष संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। उच्चतम न्यायालय में उन्होंने कई संवेदनशील और चर्चित मामलों में प्रभावी पैरवी की है।

वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त करने से जुड़े ऐतिहासिक मामले में उन्होंने समलैंगिक समुदाय के अधिकारों की मजबूती से वकालत की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इस निर्णय को उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था।

इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ में ‘सलवा जुडूम’ के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों से जुड़े मामलों में न्यायालय के मित्र (एमिकस क्यूरी) की भूमिका निभाई। अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी की ओर से भी उन्होंने पैरवी की थी।

उनके पिता मोहन गुरुस्वामी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के विशेष सलाहकार रहे थे। हालांकि, मेनका ने अपने पेशेवर जीवन में स्वतंत्र पहचान बनाई है। हाल में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर एक मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पक्ष रखा था।

मेनका गुरुस्वामी अपनी जीवनसंगिनी अरुंधती काटजू के साथ 2019 में सार्वजनिक रूप से सामने आई थीं। अब राज्यसभा के लिए उनकी उम्मीदवारी को सामाजिक समावेशन और राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

 

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