गुवाहाटी। असम में बाढ़ का पानी तेजी से उतरने के बाद अब प्रभावित इलाकों में जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश शुरू हो गई है। बाढ़ की विभीषिका झेल चुके परिवारों के सामने अब घरों में जमा गाद और मलबा हटाने, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत करने और बर्बाद हो चुकी कृषि भूमि को फिर से खेती के योग्य बनाने की चुनौती है। कई परिवार अपने घरों और खेतों को व्यवस्थित करने में जुट गए हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 19 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य की सभी प्रमुख नदियां अब खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालांकि बाढ़ का असर अभी भी शिवसागर, नगांव, गोलाघाट और जोरहाट जिलों में बना हुआ है। इन चार जिलों के 13 राजस्व मंडलों के 90 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 16,922 लोग अभी भी बाढ़ के प्रभाव से जूझ रहे हैं।
बाढ़ के कारण 3,057 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। अब पानी उतरने के बाद किसानों के सामने खेतों से गाद और मलबा हटाकर अगली फसल की तैयारी करने की चुनौती है।
प्रशासन के अनुसार राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। फिलहाल सात सरकारी राहत शिविरों में 262 लोग शरण लिए हुए हैं। वहीं, बाढ़ से प्रभावित पशुओं की संख्या 14,645 तक पहुंच गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।
राज्य सरकार ने नुकसान का आकलन करने के लिए 17 मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा है। विभिन्न इलाकों में क्षति का सर्वेक्षण जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भरोसा दिलाया है कि सर्वे पूरा होने के बाद बाढ़ से हुए सभी प्रकार के नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन की प्राथमिकता अब राहत कार्य के साथ प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में वापस लाना है।