रुड़की के साहित्यकार श्रीगोपाल नारसन को नेपाल में मिला ‘मातृभाषा रत्न’ सम्मान

रुड़की के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रीगोपाल नारसन को नेपाल में मातृभाषा सेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘मातृभाषा रत्न’ मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर यह सम्मान शब्द प्रतिभा बहुउद्देश्यीय सम्मान फाउंडेशन, काठमांडू (नेपाल) द्वारा प्रदान किया गया।

फाउंडेशन के अध्यक्ष आनन्द गिरी मायालु और चयन समिति प्रमुख मंजू खरे दतिया ने डिजिटल ई-प्रशस्ति पत्र जारी कर डॉ. नारसन के हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. नारसन ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. श्रीगोपाल नारसन ने इसे भारत की उस पावन मिट्टी को समर्पित किया, जिसके कण-कण में राष्ट्रभक्ति और मातृभाषा के प्रति प्रेम समाहित है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार है।

डॉ. नारसन इससे पूर्व भी इंडो-नेपाल लिटरेरी सम्मान तथा नेपाल में आयोजित विश्व हिंदी कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर सम्मानित हो चुके हैं। उनकी अब तक 22 पुस्तकें विभिन्न विधाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कविता, कहानी, व्यंग्य और शोधपरक साहित्य शामिल हैं।

वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष भी हैं और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से रुड़की और उत्तराखंड के साहित्य जगत में खुशी की लहर है।

 

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