लालकुआं क्षेत्र के बिंदुखत्ता राजस्व गांव में वन अधिकार अधिनियम के तहत दायर दावों को दोबारा परीक्षण के लिए भेजे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता ने इस फैसले को नियमों के विपरीत बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
समिति का एक शिष्टमंडल गौलापार स्थित पूर्व ब्लॉक प्रमुख संध्या डालाकोटी के आवास पर पहुंचे प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल से मिला और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। समिति के सदस्यों ने मंत्री को बताया कि जिला स्तर से स्वीकृत पत्रावली पिछले 18 महीनों से शासन स्तर पर लंबित थी। अब इसे वन अधिकार कानून की मंशा के विपरीत पुनः परीक्षण के लिए भेज दिया गया है, जिससे परंपरागत वन निवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
समिति सचिव भुवन भट्ट ने कहा कि यह निर्णय कानून की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में मुख्य सचिव को पांच ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक न तो कोई सुनवाई हुई और न ही कोई स्पष्ट जवाब मिला। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
समिति अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने मंत्री से लंबित राजस्व अधिसूचना जल्द जारी करने और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे लोगों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए और प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनते हुए कहा कि मामला समाज कल्याण विभाग से संबंधित है, फिर भी वे आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजेंगे और समाधान का प्रयास करेंगे।
बैठक में बसंत पांडे, बलवंत बिष्ट, भूपेश जोशी और किरन डालाकोटी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।