नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत उत्तराखंड में रह रहे 153 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र और राज्य के गृह विभाग द्वारा विस्तृत जांच और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन आवेदनों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके साथ ही वर्षों से राज्य में रह रहे इन परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से लंबे समय से भारत में रह रहे शरणार्थियों को न्याय मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत 153 आवेदनों में 147 लोग पाकिस्तान और छह लोग अफगानिस्तान से आए हैं। ये सभी 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने वालों की श्रेणी में आते हैं। पाकिस्तान से कुल 189 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 51 मामलों की प्रक्रिया अभी जारी है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 मार्च को उत्तराखंड दौरे पर आ सकते हैं। हरिद्वार में प्रस्तावित एक कार्यक्रम के दौरान स्वीकृत लाभार्थियों को औपचारिक रूप से नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने की संभावना है। राज्य सरकार और संबंधित संगठन पात्र लोगों से संपर्क कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नागरिकता पाने वाले अधिकांश परिवार पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनके कई परिजन पहले से देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में रह रहे हैं। हिंगलाज माता मंदिर से जुड़े एक पुजारी परिवार को भी नागरिकता प्रदान की गई है।
देशभर में सीएए के तहत विभिन्न राज्यों में नागरिकता देने की प्रक्रिया जारी है।