देहरादून। सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की स्वीकृतियों, प्रतिपूर्ति की प्रगति तथा 17 फरवरी 2026 तक प्राप्त नवीन प्रस्तावों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में अब तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, उन्हें शीघ्र शुरू किया जाए। विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों, सिंचाई योजनाओं, पुल निर्माण और अन्य आधारभूत संरचनात्मक परियोजनाओं में तेजी लाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी से राज्य को वित्तीय नुकसान हो सकता है।
मुख्य सचिव ने यह भी निर्देशित किया कि जिन विभागों द्वारा रीइंबर्समेंट (प्रतिपूर्ति) के दावे लंबित हैं, वे तत्काल आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें। परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करना अनिवार्य है, ताकि नाबार्ड की गाइडलाइन के अनुरूप अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विभागों को पत्र जारी कर जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में यह भी कहा गया कि प्रस्तावों की समयबद्ध प्रस्तुति, स्वीकृति के बाद त्वरित कार्यारंभ और व्यय के उपरांत शीघ्र प्रतिपूर्ति दावों की प्रक्रिया अपनाई जाए, जिससे राज्य को अधिकतम वित्तीय लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने RIDF गाइडलाइन के अनुसार 50 हजार से कम आबादी वाले शहरी क्षेत्रों की पात्रता की समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य विभागों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया, जो नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं।
धनराशि के मितव्ययी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण उपयोग के साथ सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने पर विशेष बल दिया गया।