हर घंटे 20 मौतें! क्या सड़कों पर कानून से ज्यादा रफ्तार का राज?

देश में यातायात नियमों का पालन कराना आज बड़ी चुनौती बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि कई लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी को अपनी शान समझते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट इस चिंता को और गहरा करती है। रिपोर्ट के अनुसार यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जबकि दिल्ली दूसरे स्थान पर। 8 फरवरी 2026 तक उत्तर प्रदेश में 21,38,031 मामले दर्ज किए गए, जबकि दिल्ली में 10,24,464 केस सामने आए।

पिछले कुछ वर्षों में ट्रैफिक नियम तोड़ने के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में पिछले वर्ष की तुलना में 1.59 करोड़ अधिक मामले दर्ज हुए। वर्ष 2024 में आठ करोड़ से अधिक वाहन चालकों के चालान किए गए, जिनमें आधे से ज्यादा ओवरस्पीडिंग के थे। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि नियमों की अनदेखी अब सामान्य व्यवहार बनती जा रही है।

ट्रैफिक उल्लंघन के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है। वर्ष 2023 में देश में 4.80 लाख से अधिक सड़क हादसे हुए, जिनमें 1.73 लाख लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1.77 लाख हो गई। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिदिन औसतन 470 से 485 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा रही है—यानी हर घंटे लगभग 20 मौतें। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मरने वालों में 66 प्रतिशत युवा हैं, जिनकी आयु 18 से 34 वर्ष के बीच है।

दुर्घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण तेज रफ्तार और सड़कों में गड्ढे हैं। सर्दियों में धुंध और कोहरे को अक्सर हादसों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 70 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं साफ मौसम में होती हैं। इससे स्पष्ट है कि असली समस्या लापरवाही और अनुशासनहीनता है।

चालानों की संख्या बढ़ने के बावजूद जुर्माने से प्राप्त राशि में कमी दर्ज की गई है। 2023 में 6.79 करोड़ चालानों से 4243 करोड़ रुपये वसूले गए, जबकि 2025 में 9.78 करोड़ चालानों के बावजूद 3761 करोड़ रुपये ही जमा हुए। यह प्रवृत्ति प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।

दिसंबर 2024 तक देश में 36 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत थे। वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि के मुकाबले ट्रैफिक पुलिस बल में नाममात्र की बढ़ोतरी हुई है। बड़े शहरों में जाम और अव्यवस्था आम हो चुकी है।

सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने, ट्रैफिक पुलिस बल बढ़ाने और स्वचालित कैमरों से ई-चालान प्रणाली को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। जब तक कानून का डर और अनुशासन की संस्कृति विकसित नहीं होगी, तब तक सड़कों पर ‘जंगल राज’ जैसे हालात बने रहेंगे। लाखों कीमती जानें बचाने के लिए अब ठोस और त्वरित कदम उठाने का समय आ गया है।

 

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