नई दिल्ली, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बुधवार को भारत-फ्रांस स्वास्थ्य सहयोग के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केंद्र की शुरुआत की गई। इस अवसर पर इमैनुएल मैक्रों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान ‘भारत-फ्रांस वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों के वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया। राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और फ्रांस को संप्रभु एआई क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि वे तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और बाहरी निर्भरता कम हो। उन्होंने विश्वसनीय एआई प्रणालियों के निर्माण, एल्गोरिदम में पारदर्शिता, बच्चों की सुरक्षा और भाषाई-सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह केंद्र एआई-सक्षम वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती देगा। नया एआई केंद्र बीमारियों की शीघ्र पहचान, सटीक इलाज और उन्नत मेडिकल रिसर्च में सहायक होगा।
यह पहल सोरबोन विश्वविद्यालय, पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट और आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थानों के सहयोग से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एक मंच पर लाकर स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देना है।
यह साझेदारी डिजिटल हेल्थ, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर), स्वास्थ्य मानव संसाधन और स्वास्थ्य डेटा के जिम्मेदार उपयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।