रानीखेत। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने बुधवार को रानीखेत तहसील मुख्यालय एवं उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर दिया।
आयुक्त ने तहसील न्यायालय में दायर वादों की विस्तार से समीक्षा की। कई मामलों के लंबे समय से लंबित पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित वादों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर 45 से 60 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी आम जनता के विश्वास को प्रभावित करती है, इसलिए समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है।
निरीक्षण के दौरान एक प्रकरण में फाइल पर अनावश्यक आपत्ति लगाए जाने का मामला सामने आया। इसे गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित नायब तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि कार्य में लापरवाही या अनावश्यक बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अतिरिक्त आयुक्त ने उप निबंधक कार्यालय एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान अभिलेखों के संधारण, पुराने रिकॉर्ड के संरक्षण, जनसुनवाई व्यवस्था तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को सर्वोपरि रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात सहित तहसील के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यालयों में साफ-सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन और जनसेवा से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।