देहरादून। पशुचिकित्सा विज्ञान के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद द्वारा पशुपालन विभाग के पशुचिकित्साधिकारियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंगलवार, 17 फरवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण में विभाग में कार्यरत 20 पशुचिकित्साधिकारी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पशुपालन विभाग के निदेशक डा. उदय शंकर और उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. कैलाश उनियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अधिकारियों ने पशुचिकित्सकों के कौशल विकास को समय की आवश्यकता बताया।
प्रशिक्षण सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के सहायक प्रोफेसर डा. रोहित कुमार ने पशुओं में फ्रैक्चर प्रबंधन और आधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीकों पर विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने जटिल मामलों के उपचार, सर्जिकल प्रक्रियाओं और नवीन उपकरणों के उपयोग के बारे में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।
परिषद के रजिस्ट्रार डा. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि परिषद “सतत कौशल विकास कार्यक्रम” के अंतर्गत पशुचिकित्सकों के व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने के लिए निरंतर ऐसे प्रशिक्षण आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता में सुधार परिषद की प्राथमिकता है।
निदेशक डा. उदय शंकर ने प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लागू कर पशुपालकों को बेहतर और प्रभावी सेवाएं प्रदान करें। साथ ही अपने-अपने जिलों में अन्य पशुचिकित्साधिकारियों के साथ भी इस अनुभव को साझा करें।
अध्यक्ष डा. कैलाश उनियाल ने प्रत्येक जनपद में मॉडल पशुचिकित्सालय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में पशुचिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।