गुवाहाटी। असम में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन इसका असर अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य के पांच जिलों के 92 गांवों में 14,799 लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद लोगों को राहत मिली है, लेकिन घरों और कृषि भूमि को हुए नुकसान ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। प्रभावित परिवार अब अपने घरों और खेतों को दोबारा व्यवस्थित करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर राज्य में बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री को राहत एवं पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यों की भी विस्तार से जानकारी दी।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 20 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की सभी प्रमुख नदियां अब खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालांकि, बाढ़ से हुई तबाही के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। अब तक राज्य में 106 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
बाढ़ के कारण राज्य में 3,083 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है। इससे किसानों के सामने फसल और आजीविका को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई प्रभावित परिवारों को अपने घरों और कृषि क्षेत्र को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वर्तमान में 238 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। वहीं, राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 1,165 ऐसे प्रभावित लोगों को भी जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जो राहत शिविरों में नहीं रह रहे हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने चार मेडिकल टीमों को तैनात किया है। इसके साथ ही सरकारी अधिकारी विभिन्न इलाकों में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं, ताकि राहत और पुनर्वास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
