दून विश्वविद्यालय में ‘बजट चर्चा 2.0’, क्या बोले विशेषज्ञ केंद्रीय बजट 2026–27 पर?

देहरादून। दून विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत अर्थशास्त्र विभाग एवं कुटागारशाला – आर्थिक चर्चा मंच द्वारा 13 फरवरी 2026 को “बजट चर्चा 2.0” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय बजट 2026–27 के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के विचार, छात्रों की शोधपरक प्रस्तुतियां और संवादात्मक चर्चा के माध्यम से बजट के व्यापक आर्थिक प्रभावों को समझने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम का संचालन प्राची और स्वाति ने किया। इसमें विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के पूर्व अपर सचिव (वित्त) श्री चंद्र शेखर सेमवाल उपस्थित रहे। इसके साथ ही सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आर. पी. ममगाई, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एच. सी. पुरोहित तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित नागर भी मंच पर मौजूद रहे।

### बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर

छात्रों की प्रस्तुतियों में केंद्रीय बजट 2026–27 की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि इस बार के बजट में बुनियादी ढांचे के विकास को केंद्रीय रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के माध्यम से लॉजिस्टिक्स, परिवहन, शहरी आधारभूत संरचना और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया है।

विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। रेलवे नेटवर्क का विस्तार, माल परिवहन गलियारों का विकास और शहरी ढांचे में निवेश से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

### विनिर्माण और सेमीकंडक्टर पर फोकस

चर्चा में विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की नीति पर भी विस्तार से बात की गई। छात्रों ने अपने विश्लेषण में बताया कि सरकार ने सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी उद्योगों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन श्रृंखला को मजबूत बनाना है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि यह रणनीति सफल होती है तो भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र की धीमी प्रगति और संरचनात्मक चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की गई।

### एमएसएमई और कृषि क्षेत्र

एमएसएमई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और विस्तार क्षमता बढ़ाने के लिए सुधारों पर ध्यान दिया गया है। छात्रों ने कहा कि लघु और मध्यम उद्योगों को सस्ती ऋण सुविधा, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच प्रदान करना आवश्यक है।

कृषि क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत बजट वृद्धि, उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी और कृषि विविधीकरण पर जोर दिया गया है। हालांकि कृषि अनुसंधान के लिए अपेक्षाकृत कम आवंटन पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनुसंधान और नवाचार में निवेश बढ़ाना जरूरी है।

### डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र

तृतीयक क्षेत्र की प्रस्तुति में डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, पर्यटन और रोजगार सृजन करने वाली सेवाओं के विस्तार पर प्रकाश डाला गया। “शिक्षा से रोजगार और फिर उद्यम” की अवधारणा के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और स्टार्टअप की दिशा में प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

विशेषज्ञों का मत था कि सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बना हुआ है और इसे विनिर्माण के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

### रक्षा और अनुसंधान

रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण, स्वदेशी उत्पादन, अनुसंधान और नवाचार को महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में रक्षा उत्पादन में निवेश रणनीतिक दृष्टि से भी आवश्यक है।

### समालोचनात्मक समीक्षा

बजट की आलोचनात्मक समीक्षा में यह सामने आया कि बुनियादी ढांचे पर आधारित विकास नीति प्रमुख दिशा के रूप में उभर रही है। हालांकि पर्यावरणीय स्थिरता, श्रम उत्पादकता और समावेशी विकास जैसे मुद्दों पर और अधिक ठोस प्रयासों की आवश्यकता बताई गई।

उत्तराखंड के संदर्भ में विद्यार्थियों ने कहा कि राज्य के लिए कोई बड़ी विशेष घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में सुधार से राज्य को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।

### मुख्य अतिथि का संबोधन

अपने संबोधन में श्री चंद्र शेखर सेमवाल ने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार अनिवार्य है। उन्होंने रेलवे, लॉजिस्टिक्स और परिवहन संपर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आधारभूत संरचना का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत औद्योगिक तंत्र भी जरूरी है ताकि निवेश का लाभ रोजगार और उत्पादन वृद्धि के रूप में सामने आए।

वित्तीय अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बड़े पूंजीगत व्यय के साथ आर्थिक स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। इससे निवेशकों का विश्वास कायम रहता है और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है।

कार्यक्रम के अंत में संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे और बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। “बजट चर्चा 2.0” ने विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक नीतियों को समझने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में भी प्रेरित किया।

 

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